चुनाव से पहले आख़िरी फुल बजट, निगाहें टिकीं विधानसभा पर

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से ठीक पहले योगी आदित्यनाथ सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट बुधवार को सदन में पेश करने जा रही है। अनुमान है कि इस बार बजट का आकार 9 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो सकता है—जो अपने आप में एक रिकॉर्ड माना जा रहा है।

बजट की औपचारिक तैयारी पूरी

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने मंगलवार को बजट दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया। बजट से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक होगी, जिसमें CAG रिपोर्ट और कई अहम प्रस्तावों को हरी झंडी दी जाएगी।

विकास + लोकलुभावन का कॉम्बिनेशन?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बजट सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेशों का भी दस्तावेज होगा। एक तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश पर जोर रहेगा, तो दूसरी तरफ पेंशन, छात्र और युवाओं से जुड़ी योजनाएं सरकार की प्राथमिकता हो सकती हैं।

पेंशन में बढ़ोतरी का संकेत

चर्चा है कि वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित महिलाओं, दिव्यांगजनों को मिलने वाली मासिक सहायता ₹1000 से बढ़ाकर ₹1500 की जा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह फैसला लाखों परिवारों को सीधे राहत देगा।

छात्राओं को स्कूटी, युवाओं को टैबलेट

पिछले बजट में घोषित मेधावी छात्रा स्कूटी योजना को इस साल जमीन पर उतारने की तैयारी है। वहीं, स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत टैबलेट वितरण की संख्या बढ़ाने पर भी विचार हो रहा है।

पूर्वांचल-बुंदेलखंड पर खास नजर

पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे पिछड़े इलाकों के लिए करीब ₹2000 करोड़ की नई परियोजनाएं शुरू हो सकती हैं। उद्देश्य साफ है—रीजनल डेवलपमेंट के जरिए चुनावी समीकरण मजबूत करना।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर फिर बड़ा दांव

अनुमान है कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर: ₹2.5 लाख करोड़+, गृह विभाग: ₹45,000 करोड़+, AI-based surveillance, cyber security और smart policing पर भी निवेश बढ़ सकता है।

शिक्षा, अनुदेशक और शिक्षामित्र

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि। एरियर भुगतान के लिए ₹250 करोड़। शिक्षामित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी। जैसे फैसले बजट में शामिल हो सकते हैं।

निवेश, उद्योग और शहरों का विस्तार

डिफेंस कॉरिडोर, औद्योगिक गलियारे, बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण के लिए फंड बढ़ सकता है। शहरी इलाकों में नई टाउनशिप, मेट्रो प्रोजेक्ट, बस अड्डों के आधुनिकीकरण और सड़क-पुल निर्माण पर भी खास फोकस रहेगा।

चुनाव पास हैं, बजट बड़ा है, और वादों की लिस्ट भी लंबी… अब देखना ये है कि घोषणा ज़मीन पर उतरती है या पोस्टर पर ही रुक जाती है।

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